भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं आज़ाद हिंद फ़ौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रणी नायकों में हैं, जिन्होंने राष्ट्र की स्वाधीनता को अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लिया। उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में चयनित होने के बाद भी उन्होंने पद और वैभव का मार्ग त्यागकर मातृभूमि की सेवा का कठिन पथ चुना। यह त्याग स्वयं में उनके अदम्य राष्ट्रप्रेम का प्रमाण है।

नेताजी ने आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना कर स्वतंत्रता संग्राम को एक नया स्वरूप एवं नई ऊर्जा प्रदान की। उनका उद्घोष 'जय हिंद' आज राष्ट्र का गौरवपूर्ण अभिवादन बन चुका है और प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति का संचार करता है। उन्होंने देशवासियों को यह विश्वास दिलाया कि संगठित संकल्प एवं अनुशासित साहस के समक्ष कोई भी शक्ति अजेय नहीं है।

नेताजी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनका नेतृत्व-सामर्थ्य और समावेशी दृष्टि थी। उन्होंने भाषा, प्रांत, जाति एवं पंथ की सीमाओं से ऊपर उठकर समस्त भारतीयों को एक ध्येय के लिए संगठित किया। आज़ाद हिंद फ़ौज में देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों के सैनिक एक ध्वज के नीचे एकजुट हुए — यह एकता का अनुपम उदाहरण है।

उनके नेतृत्व की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि उन्होंने नारी शक्ति को स्वतंत्रता संग्राम में सम्मानपूर्वक स्थान दिया। आज़ाद हिंद फ़ौज में महिलाओं की सहभागिता उस काल में एक क्रांतिकारी कदम था, जो नेताजी की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।

आज जब राष्ट्र विकसित, सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की दिशा में अग्रसर है, नेताजी का जीवन हमें अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र-प्रथम की भावना का स्मरण कराता है। उनका आदर्श विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।

नेताजी का अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और देश की स्वतंत्रता के लिए उनका समर्पण सदैव हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। उनके श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन।

जय हिंद!

— संतोष सिकरवार
जिला उपाध्यक्ष, भाजपा आगरा

———

English

Santosh Sikarwar, District Vice President, Bharatiya Janata Party, Agra, paid humble tribute to Netaji Subhas Chandra Bose, the great hero of India's freedom struggle and founder of the Azad Hind Fauj, on his death anniversary.

Netaji was among the foremost leaders of the independence movement, making the nation's freedom the single aim of his life. Despite qualifying for a prestigious administrative service, he gave up position and comfort to choose the harder path of serving his motherland.

By founding the Azad Hind Fauj he gave the freedom struggle new form and new energy. His call of 'Jai Hind' is today the nation's proud salutation. He united Indians across barriers of language, province, caste and creed, and gave women an honoured place in the Azad Hind Fauj — a revolutionary step for that era.